Saturday, September 8, 2012

Be human.

इन्सान बनो
इन्सान बनना को छोटी बात नहीं और न ही कोई बड़ी बात है।आजकल ज्यादातर आदमी मशहूर होने के लिए गलत रुख इक्तियार कर लेते है।वो आदमी गलत कम करने से पहले ये नहीं सोचता की उसे अल्लाह के पास जवाब देना है।
घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे, 
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला.

लोग दुनियावी बातो में इतने खो जाते है की उन्हें आखिरत का कोई खयाल ही नहीं रहता।लोगो के लिए रूपये ही सब कुछ हो गए है।लोग जाती मजहब धर्म के नाम पर एक दुसरे से लड़ते है।उन्हें ये सब करके क्या मिलाता है।खून दोनों ओर से बहता है।फिर भी लोगो को कुछ हांसिल नहीं होता।दोनों और से लोग अपनी सत्ता को ऊँची रखने की होड़ में लगे रहते है।हर धर्म या मजहब में ये लिखा हुआ है की हर इन्सान को दुसरे इन्सान की मदद करनी चाहिए।उनमे ये कहाँ लिखा हुआ है की एक मुस्लिम को सिर्फ मुस्लिम की ही मदद करनी चाहिए या एक हिन्दू को सिर्फ एक हिन्दू की ही एक सिक्ख को सिर्फ एक सिक्ख की ही या फिर एक इसाई को सिर्फ इसाई की ही मदद करनी चाहिए।में मानता हूँ की सभी लोग ऐसे नहीं है।हदीस में लिखा है की हमें किसी बुरी बात में किसी का साथ नहीं देना चाहिए।अगर कही कोई बुरा काम हो रहा है तो हमें उनके खिलाफ बोलना चाहिए अगर बुरा काम करने वाला हमसे ज्यादा ताकतवर हे तो हम उस बुरे काम को अपने दिल में बुरा मान सकते हे इससे उस काम का अजाब हम पर नहीं पड़ेगा।पर जहाँ तक हो सके उस बुरे काम को रोकने का प्रयास करे।इंसानियत का सन्देश घर घर में पंहुचाना ही हमारा पहला कृतव्य होना चाहिए।हिंदुस्तान जिन्दाबाद

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