मुंबई पर हमला हुआ दिल्ली ,जयपुर ,अजमेर ,एर इसी कई जगहों पर आतंकवादी हमले हुए।सेकड़ो इन्सान मारे गए।पर क्या इन हमलो में सिर्फ हिन्दू ही मरे गए या फिर सिर्फ मुस्लिम ही मारे गए।तो फिर लोग क्यों एक दुसरे पर इलज़ाम लगते है।में एक मुस्लिम हूँ इसके साथ साथ में एक हिन्दुस्तानी भी हूँ।मेने अपने मुल्क से गद्दारी करने के बारे में कभी नहीं सोचा।मुझे ये सब सोचने से पहले मोत अपनी आगोश में ले ले तो में बेहतर मानूंगा।में चाहता हूँ ये होसला हर मुसलमान के दिल में हो ,अगर वो सच्चा मुसलमान है तो उसके दिल में अपने वतन से पयार जरुर होगा क्योंकि कुरआन शरीफ में भी अपने वतन से प्यार करने और उन पर मर मिट जाने की हिदायत देता है।
में उन लोगो से खफा हूँ जो हमारे दिल को ठेस पहुंचाते है,हमारे दिल जो वतन के लिए देशभक्ति की भावना है उसे मिटाने का एक असफल प्रयास करते है।पर उनके इन प्रयासों से हमारा होंसला और बुलंद होता है।जिन्हें पाकिस्थान जाना था वो सन 1947 को ही पाकिस्तान चले गए पर कुछ मुट्ठी भर लोग हमें हमें क्यों जाने के लिए उकसाते है।जब इंडिया पाकिस्तान से मेच जीतता है तो हमें भी उतनी ही ख़ुशी होती है जीतनी की आपको और पुरे हिंदुस्तान को पर क्यों वो पटाके हमारे घर के बाहर ही आकर जलाते है ढोल हमारे घर के बाहर ही आकर क्यों बजाते है।मुझे समझ नहीं आता वो हमें समझते क्या है।पर वो जो भी समझते है हमें बहुत बुरा लगता है।इन्टरनेट पर ब्लॉग के बहाने वो क्यों मुस्लिम पर कीचड़ उछालते है।कुरान और हदीस पर गलत कमेन्ट करने वालो से में कहना चाहता हूँ की पहले वो अपने धर्म के ग्रंथो का अच्छी तरह से अध्ययन करे।जब उनको अपने धर्मो का पूरी तरह से अध्ययन कर ले तो फिर अपने धर्मो की अच्छाईया लोगो तक पहुँचाए दुसरो के धर्म पर कमेन्ट ना करें।धन्यवाद

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