Why are we fighting?
हम एक ही देश के निवासी है।फिर भी हिन्दू मुस्लिम आपस में क्यों लड़ रहे है?क्या एक हिन्दू जिस खेत का अनाज खाता है तो मुस्लिम उस खेत का अनाज खाना छोड़ देता है?क्या एक मुस्लिम जिस दुकान या शोरुम से कपडे लाता है तो हिन्दू उस दुकान या शोरुम से कपडे लाना छोड़ देता है?तो फिर हम क्यों लड़ रहे है?इस बात का सही तरीके से जवाब किसी के पास नहीं है।आपस में लड़ना तो इन्सान की प्रकर्ति है।हम पुरे देश की बात नहीं लेते एक परिवार की बात लेते है।परिवार में एक अगर दो भाई है तो वो भी छोटी-छोटी बातों में एक-दुसरे से लड़ते है।पडोसी है तो वो भी आपस में बैर रखते है।एक गाँव दुसरे गाँव से आगे निकलने में लगा रहता है।गाँव से बाहर निकलकर शहर की तरफ आइये एक शहर के लोग दुसरे शहर को देखकर यही सोचते है की फलाने शहर में ये सुविधा है हमारे शहर में क्यों नहीं,एक देश के लोग दुसरे देश के लोगो से बेर रखते है।लड़ाई का महत्वपूर्ण कारण है बेसब्री,अगर आदमी सब्र करने लग जाये तो में गारंटी देता हूँ की लड़ाई दंगे फसाद नहीं होंगे।
लड़ाई का दूसरा कारण है लालच,एक कहावत भी है सबने सुन ही राखी होंगी की"लालच बुरी बला है" जो व्यक्ति लालच करता है जाहिर सी बात है वो बेसब्र भी होगा।लालच आदमी को अन्धकार की कगार पर ले जाती है,उसका विनाश कर देती ही है।आपने वो ''ए राजा'' का मामला तो सुन ही रखा होगा उसने अधिक से अधिक पैसे कमाने के लिए घोटाले पे घोटाले किये आज वो जैल की सलाखों के पीछे है।इसलिए में तो कहता हु भाई सब्र करो सब्र का फल मीठा होता है।हदीस और कुरआन में भी सब्र करने की हिदायत दी गयी।
किस्मत में जो होता है वो मिलकर ही रहता है,,,,किसी ने कहा है की "वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा कुछ नहीं मिलाता''
अल्लाह पाक ने जो दिया है उसमे सब्र करो और उससे दुआ करते रहो क्योकि वो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है।जो इन्सान अल्लाह से मांगता है अल्लाह उन्हें कभी निराश नहीं करता।अल्लाह से मांगो पर नेकी की रह मत छोड़ो हमेशा दुसरो की मदद करो।अल्लाह तुम्हे और हमें खूब देगा।आमीन

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