Tuesday, August 28, 2012

हिन्दुस्तान की आजादी में इस्लाम का योगदान

हिन्दुस्तान की आजादी में इस्लाम का योगदान 

जो लोग ये सोचते हें की देश को आजाद करने के लिए मुसलमानों का कोई हाथ नहीं।पुरे हिंदुस्तान  को गैर मुस्लिमो ने हि आजाद कराया है , मे उन लोगो को इस्लाम के बलिदान के बारे बताता हूँ।
हिन्दुस्थान को आजाद कराने के लिए अगर किसी ने जिम्मा उठाया वो एक मुस्लिम था।नाम था मजनू शाह मलंगइन्होने अंग्रेजो के खिलाफ जंग का  एलान  सन-1761 में लड़ी  इस जंग 'उदुअनाला की जंग 'के नाम से जाना जाता है।इन्होने  'बक्सर  की जंग ' सन-1764 में लड़ी।
पर देश के ही कुछ महान  आदमियों ने उनके नाम को फाइलों में दबा दिया।
इसका यह नतीजा निकला की लोग उनके नाम को भूल चुके है। उनके बारे में बताने का कुछ पर्यत्न करता हूँ।
 मजनू शाह मलंग 
                        मजनू  शाह मलंग एक सन्यासी फकीर के रूप में जाना जाता है।
मजनू शाह मलंग का दूसरा नाम 'अबु तालिब 'था।उनके मलंग बनने के बाद लोग उन्हें मजनू मलंग तथा मजनू शाह बुरहान के नाम से जानने लगे।उनका मदारगंज में उनका अस्थाई निवास था।मजनू शाह बोगरा जिले बलियाकांदी में भी रहते थे।इन्होने सबसे पहले हिंदुस्तान को आजाद कराने जिम्मा उठाया।इन्होने कोमी एकता पर बल दिया।मजनू मलंग ने हिन्दू  सन्यासियों और मुस्लिम लोगों को इकट्टा किया और अंग्रेजो से लड़ने के लिए प्रेरित किया।जब साडी जनता इकट्ठी हो गयी तो उन्होंने मजनू शाह के नेतृत्व में जंग लड़ने का फेसला किया।उनका मुख्यालय कानपूर के पास मकनपुर में था।
25 फरवरी 1771 में इनकी जंग ब्रिटिस सरकार से हुई,उस समय ब्रिटिस सरकार का नेतृत्व लेफ्टिनेंट फेल्थम कर रहा था।यह जंग असफल रही। 
इनकी दूसरी जंग 23 दिसम्बर 1773 में हुइ।यह जंग भी असफल रही।
8 दिसम्बर 1786 की लड़ाई में मजनू शाह मलंग घायल हो गए।मजनू शाह मलंग इस जंग के बाद मकनपुर चले गए।माना जाता हे की 1787में मजनू शाह मलंग का इंतकाल हो गया।
उनके इंतकाल के बाद उनके भतीजे मुषा शाह ने उनकी जगह नेतृत्व किया।1792 में हुई अंग्रेजो के साथ जंग में वो सहीद हो गए।

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